NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Chapter 9

NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Chapter 9

नवमः पाठः सिकतासेतुः  (बालू मिट्टी का पुल) प्रस्तुत नाट्यांश सोमदेवरचित कथासरित्सागर के सप्तम लम्बक (अध्याय) पर आधारित है। यहाँ तपोबल से विद्या पाने के लिए प्रयत्नशील तपोदत्त नामक एक बालक की कथा का वर्णन है।

नवमः पाठः सिकतासेतुः  (बालू मिट्टी का पुल)

पाठ परिचय- प्रस्तुत नाट्यांश सोमदेवरचित कथासरित्सागर के सप्तम लम्बक (अध्याय) पर आधारित है। यहाँ तपोबल से विद्या पाने के लिए प्रयत्नशील तपोदत्त नामक एक बालक की कथा का वर्णन है। उसके समुचित मार्गदर्शन के लिए वेष बदलकर इन्द्र उसके पास आते हैं और पास ही गंगा में बालू से सेतु-निर्माण के कार्य में लग जाते हैं। उन्हें वैसा करते देख तपोदत्त उनका उपहास करता हुआ कहता है  ‘अरे! किसलिए गंगा के जल में व्यर्थ ही बालू से पुल बनाने का प्रयत्न कर रहे हो?’

इन्द्र उन्हें उत्तर देते हैं—यदि पढ़ने, सुनने और अक्षरों की लिपि के अभ्यास के बिना तुम विद्या पा सकते हो तो बालू से पुल बनाना भी सम्भव है। इन्द्र के अभिप्राय को जानकर तपोदत्त तपस्या करना छोड़कर गुरुजनों के मार्गदर्शन में विद्या का ठीक-ठीक अभ्यास करने के लिए गुरुकुल चला जाता है।

पाठ का सप्रसंग हिन्दी अनुवाद

(1) NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Chapter 9

(ततः प्रविशति तपस्यारतः तपोदत्तः)

तपोदत्तः- अहमस्मि …………………… प्रवृत्तोऽस्मि।

कठिन शब्दार्थ- तपस्यारतः = तपस्या में लीन । बाल्ये = बचपन में । पितृचरणैः = पिताजी के द्वारा। क्लेश्यमानोऽपि =  व्याकुल किया जाता हुआ भी। नाऽधीतवान् = अध्ययन  नहीं किया। कुटुम्बिभिः = परिवारजनों के द्वारा । ज्ञातिजनैः =  बन्धु-बान्धवों के द्वारा । गर्हितः = अपमानित । ऊर्ध्वम् =  ऊपर की ओर, लम्बी। निःश्वस्य = साँस लेकर। हा विधे! =  हाय विधाता। दुर्बुद्धिः = दुष्ट बुद्धि वाला।

परिधानैः = वस्त्रों से, पहनावों से। अलङ्कारैः = आभूषणों से। भूषितः = सुशोभित । नरः = मनुष्य। निर्मणिभोगीव = मणि से रहित सर्प की तरह। विमृश्य = विचार करके। मार्गभ्रान्तः = राह/मार्ग से भटका हुआ। उपैति = आ जाता है, समीप जाता है। वरम् = श्रेष्ठ है। भ्रान्तः = भटका हुआ। मन्यते = माना जाता है। अवाप्तुम = प्राप्त करने के लिए। प्रवृत्तः = तत्पर।

प्रसंग- प्रस्तुत कथांश हमारी संस्कृत की पाठ्यपुस्तक ‘शेमुषी’ (प्रथमोभागः) के सिकतासेतुः’ शीर्षक पाठ से उद्धृत किया गया है। मूलतः यह पाठ सोमदेवविरिचत कथासरित्सागर’  के सप्तम लम्बक (अध्याय) से संकलित है। इसमें तपोबल से विद्या प्राप्त करने के लिए प्रयत्नशील एक भ्रमित बालक को इन्द्र द्वारा अपने कार्य से समुचित मार्गदर्शन दिए जाने का प्रेरणास्पद वर्णन है। प्रस्तुत अंश में तपस्या में लीन तपोदत्त बचपन में विद्या प्राप्त न कर पाने से दुःखी होकर जो विचार व्यक्त करता है, उनका वर्णन किया गया है।

हिन्दी अनुवाद- (इसके बाद तपस्या में लीन तपोदत्त का प्रवेश होता है।)

तपोदत्त- मैं तपोदत्त हूँ। बचपन में पिताजी द्वारा व्याकुल (कड़ा व्यवहार) किये जाने पर भी मैंने विद्याध्ययन नहीं किया। जिस कारण से सभी परिवारजनों, मित्रों और बन्धु-बान्धवों द्वारा मैं निन्दा का पात्र बना।

(ऊपर की ओर लम्बी साँस लेकर)

हाय विधाता ! मेरे द्वारा यह क्या किया गया? उस समय मैं कैसी दुष्ट बुद्धि वाला था? यह भी मैंने नहीं सोचा कि श्रेष्ठ वस्त्रों और आभूषणों से सुशोभित होने पर भी बिना विद्या के मनुष्य मणि से रहित सर्प के समान घर में अथवा सभा में शोभा नहीं पाता।

(कुछ विचार करके)

Class 9 Sanskrit ठीक है, ऐसा सोचने से क्या प्रयोजन? दिन में रास्ता भटका हुआ मनुष्य यदि शाम को घर आ जाता है तो भी अच्छा है। वह भटका हुआ (भ्रमित) नहीं माना जाता है। अब मैं तपस्या के द्वारा विद्या प्राप्त करने में प्रवृत्त हो गया हूँ।

(2) NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Chapter 9

(जलोच्छलनध्वनिः श्रूयते)

अये कृतोऽयं ………………………. कर्तुं युज्यते?

कठिन शब्दार्थ- जलोच्छलनध्वनिः = जल के उछले की आवाज। श्रूयते = सुनाई देती है। कुतः = कहाँ से। कल्लोलोच्छलनध्वनिः = तरंगों (लहरों) के उछलने की आवाज। महामत्स्यः = बहुत बड़ी मछली। मकरः = मगरमच्छ। सिकताभिः = बालू रेत से। सेतुः = पूल। कुर्वाणम् = करते हुए। सहासम् = हँसते हुए। हन्त = खेद है। जगति = संसार में। मूढः = मूर्ख। निर्मातुम् = निर्माण करने के लिए। प्रयतते = प्रयत्न कर रहा है। साट्टहासम् = जोर से हँसकर। पार्श्वमुपेत्य = पास जाकर। विधीयते = किया जा रहा है। अलम् = पर्याप्त है। बबन्ध = बाँधा था। मकरालये = समुद्र में। विदधद् = बनाते हुए। अतिरामताम् = राम से भी बढ़कर। चिन्तय = सोचो। युज्यते = उचित है।

प्रसंग- प्रस्तत कथांश हमारी संस्कृत की पाठ्यपुस्तक ‘शेमुषी’ (प्रथमोभागः) के सिकतासेतुः शीर्षक पाठ से उद्धत है। जो मूलतः कथासरित्सागर से संकलित है। इस अंश में विद्या-प्राप्ति हेतु तपस्यारत तपोदत्त द्वारा गंगा नदी के तीव्र  प्रवाह में एक व्यक्ति को रेत से पुल बनाते हुए देखकर उसका उपहास किये जाने का वर्णन हुआ है।

हिन्दी अनुवाद- (पानी के उछलने की आवाज सुनाई देती  है।)

अरे! यह लहरों के उछलने की आवाज कहाँ से आ रही है? कोई बहुत बड़ी मछली है अथवा मगरमच्छ होगा। मैं जरा देखता हूँ।

[एक मनुष्य को बालू (रेत) से पुल बनाने का प्रयत्न करते हुए देखकर हँसते हुए।]

खेद है, संसार में मूर्खों की कोई कमी नहीं है। अत्यधिक तेज प्रवाह वाली नदी में यह मूर्ख बालू (रेत) से पुल बनाने का प्रयत्न कर रहा है।

(ठहाके लगाकर हँसता हआ उसके पास आकर)

हे महानुभाव ! आप यह क्या कर रहे हैं? व्यर्थ में परिश्रम मत करो। देखो-राम ने समुद्र में जिस पुल को शिलाओं द्वारा बनाया था, ऐसा ही पुल बालू (रेत) से बनाते हुए तुम तो राम से भी बढ़ कर हो रहे हो। जरा सोचो तो, कहीं बालू (रेत) से भी पुल बनाया जा सकता है?

(3) NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Chapter 9

पुरुषः- भोस्तपस्विन् ! ………………

विना लिप्यक्षरज्ञानं ……………… तथा मम।

कठिन शब्दार्थ- उपरुणत्सि = रोकते हो। सिकता  = रेत, बालू । स्थास्यन्ति = रुकेगी। सोत्प्रासम् = उपहासपूर्वक, खिल्ली उड़ाते हुए। सोपानमार्गेः = सीढियों के रास्ते से। अट्टम् = अटारी को। अधिरोढ़म् = चढ़ने के लिए। विश्वसिमि = विश्वास करता हूँ। समुत्प्लुत्यैव  = उछल कर ही। क्षमः = समर्थ। आञ्जनेयम् = अञ्जनिपुत्र हनुमान् को। अतिक्रामसि = अतिक्रमण कर रहे हो। सविमर्शम् = सोचविचार कर।

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Class 9 Sanskrit Chapter 8 लौहतुला

प्रसंग- प्रस्तुत कथांश हमारी संस्कृत की पाठ्यपुस्तक ‘शेमुषी’ (प्रथमोभागः) के सिकतासेतुः नामक पाठ से उद्धत है, जो मूलतः सोमदेवविरचित कथासरित्सागर के सप्तम लम्बक (अध्याय) से संकलित किया गया है। Class 9 Sanskrit इस अंश में विद्या प्राप्ति हेतु तपोरत तपोदत्त द्वारा गंगा नदी के प्रवाहयुक्त जल में बालू (रेत) से पुल बनाने का प्रयत्न करने वाले पुरुष का उपहास किये जाने का तथा उस पुरुष द्वारा बिना अक्षर-ज्ञान के तपस्या द्वारा ही विद्या-प्राप्ति का प्रयत्न करने वाले तपोदत्त के प्रति व्यंग्यपूर्ण प्रत्युत्तर दिये जाने का सुन्दर वर्णन हुआ है।

हिन्दी अनुवाद- NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Chapter 9

पुरुष- हे तपस्वी! मुझे क्यों रोक रहे हो? प्रयत्न करने से क्या कार्य सिद्ध नहीं होता है? शिलाओं की क्या आवश्यकता है? मैं अपने दृढ़ संकल्प से बालू (रेत) से ही पुल का निर्माण करूँगा।

तपोदत्त- आश्चर्य है ! बालू (रेत) से ही पुल का निर्माण करोगे? क्या बालू (रेत) जल के प्रवाह में रुकेगी? आपने यह सोचा भी है या नहीं?

पुरुष- (उपहासपूर्वक) सोचा है, सोच लिया है। अच्छी प्रकार से सोच लिया। मैं सीढ़ी के मार्ग से अट्टालिका पर चढ़ने में विश्वास नहीं करता हूँ। उछलकर ही वहाँ जाने में समर्थ हूँ।

तपोदत्त- (व्यंग्य सहित) शाबाश! शाबाश! अञ्जनीपुत्र हनुमान से भी बढ़कर ही!

पुरुष- (विचारपूर्वक) इसमें क्या सन्देह है? क्योंकि यदि बिना लिपि-ज्ञान के और अक्षर-ज्ञान के, केवल तपस्या से ही तुम विद्या को प्राप्त कर सकते हो, तो मेरा यह बालू का पुल क्यों नहीं बन सकता?

(4) NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi

तपोदत्तः- (सवैलक्ष्यम् आत्मगतम्)

अये ! मामेवोद्दिश्य ……………….. गच्छामि।

(सप्रणामं गच्छति)

कठिन शब्दार्थ- सवैलक्ष्यम् = लज्जापूर्वक। आत्मगतम् = मन ही मन में। अधिक्षिपति = आक्षेप कर रहा है। नूनम् = निश्चय ही। वैदुष्यम् = विद्वत्ता । अवाप्तुम् = प्राप्त करने के लिए। अभिलषामि = अभिलाषा कर रहा हूँ। पुरुषार्थैः = परिश्रम से। जाने = जानता हूँ। उन्मलितम् = खोल दी है। नयनयुगलम् = दोनों नेत्र । प्रयतमानः = प्रयत्न करता हुआ।

प्रसंग- प्रस्तुत कथांश हमारी संस्कृत की पाठ्यपुस्तक ‘शेमुषी (प्रथमोभागः) के सिकतासेतुः नामक पाठ से उद्धत किया गया है। मूलतः यह पाठ सोमदेवविरिचत कथासरित्सागर’ के सप्तम लम्बक (अध्याय) से संकलित किया गया है। इस अंश में बालू (रेत) से गंगा नदी के जल के प्रवाह में पुल बनाने का प्रयत्न करने वाले परुष की व्यंग्योक्ति से केवल तपस्या द्वारा विद्यार्जन करने वाले तपोदत्त को सही मार्गदर्शन प्राप्त होने का तथा विद्याध्ययन हेतु गुरुकुल में जाने का प्रेरणास्पद वर्णन हुआ है।

हिन्दी अनुवाद- NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi

तपोदत्त- (लज्जापूर्वक अपने मन ही मन में) अरे! यह सज्जन तो मुझे ही लक्ष्य करके आक्षेप कर रहा है। निश्चय ही इसमें सत्यता देख रहा हूँ। मैं बिना अक्षर-ज्ञान के ही विद्वत्ता प्राप्त करने की अभिलाषा कर रहा हूँ। इसलिए यह तो भगवती सरस्वती का तिरस्कार है। मुझे गुरुकुल में जाकर ही विद्या का अभ्यास करना चाहिए। परिश्रम से ही लक्ष्य की प्राप्ति होती है।

(प्रकट रूप में) हे नरश्रेष्ठ! मैं नहीं जानता कि आप कौन हैं? परन्तु आपने मेरी आँखें खोल दी हैं। केवल तपस्या के बल से ही  विद्या-प्राप्ति का प्रयत्न करता हुआ मैं भी बालू (रेत) से ही पुल बनाने का प्रयास कर रहा हूँ। इसलिए अब मैं विद्या-अध्ययन के लिए गुरुकुल में ही जाता हूँ। (प्रणाम करके चला जाता है।)

पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. एकपदेन उत्तरं लिखत

(क) कः बाल्ये विद्यां न अधीतवान्?

(ख) तपोदत्तः कया विद्याम् अवाप्तुं प्रवृत्तः अस्ति?

(ग) मकरालये कः शिलाभिः सेतुं बबन्ध?

(घ) मार्गभ्रान्तः सन्ध्यां कुत्र उपैति?

(ङ) पुरुषः सिकताभिः किं करोति?

उत्तराणि- NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi

(क) तपोदत्तः।

(ख) तपश्चर्या

(ग) रामः।

(घ) गृहम्

(ङ) सेतुनिर्माणम्।

प्रश्न 2. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत

(क) अनधीतः तपोदत्त कैः गर्हितोऽभवत्?

(अध्ययन न किया हुआ तपोदत्त किनके द्वारा निन्दित हुआ?)

उत्तर- अनधीतः तपोदत्तः कुम्बिभिः मित्रैश्च गर्हितोऽभवत्।

(अध्ययन न किया हुआ तपोदत्त परिवारजनों और मित्रों द्वारा निन्दित हुआ।)

(ख) तपोदत्तः केन प्रकारेण विद्यामवाप्तुं प्रवृत्तोऽभवत्?

(तपोदत्त किस तरह से विद्या प्राप्त करने के लिए प्रवृत्त हुआ?)

उत्तर- तपोदत्तः तपोभिरेव विद्यामवाप्तुं प्रवृत्तोऽभवत्।

(तपोदत्त तपस्या के द्वारा विद्या प्राप्त करने के लिए प्रवृत्त हुआ।)

(ग) तपोदत्तः पुरुषस्य कां चेष्टां दृष्टवा अहसत?

(तपोदत्त पुरुष को किस चेष्टा को देखकर हँसा था?)

उत्तर- तपोदत्तः पुरुषं सिकताभिः नद्यां सेतुनिर्माण प्रयासं कुर्वाणं दृष्ट्वा अहसत्।

[तपोदत्त पुरुष को बालू (रेत) से नदी में पुल बनाने का प्रयास करता हुआ देखकर हँसा था।]

(घ) तपोमात्रेण विद्या प्राप्तुं तस्य प्रयासः कीदृशः कथितः?

(केवल तपस्या से विद्या प्राप्त करने का उसका प्रयास किस प्रकार का कहा गया है?)

उत्तर- तपोमात्रेण विद्यां प्राप्तुं तस्य प्रयासः सिकताभिः नद्यां सेतु निर्माण प्रयासः कथितः।

[केवल तपस्या के द्वारा विद्या प्राप्त करने के लिए उसका प्रयास बालू (रेत) से नदी में पुल बनाने का प्रयास कहा गया है।]

(ङ) अन्ते तपोदत्तः विद्याग्रहणाय कुत्र गतः?

(अन्त में तपोदत्त विद्या ग्रहण करने के लिए कहाँ गया?)

उत्तर- अन्ते तपोदत्तः विद्याग्रहणाय गरुकलं गतः।

(अन्त में तपोदत्त विद्या ग्रहण करने के लिए गुरुकुल में गया।)

प्रश्न 3. भिन्नवर्गीयं पदं चिनुत

यथा- अधिरोढुम्, गन्तुम्, सेतुम्, निर्मातुम् ।

(क) निःश्वस्य, चिन्तय, विमृश्य, उपेत्य।

उत्तर- चिन्तय

(ख) विश्वसिमि, पश्यामि, करिष्यामि, अभिलषामि।

उत्तर- करिष्यामि

(ग) तपोभिः, दुर्बुद्धिः, सिकताभिः, कुटुम्बिभिः।

उत्तर- दुर्बुद्धिः

प्रश्न 4. (क) रेखाङ्कितानि सर्वनामपदानि कस्मै प्रयुक्तानि?

(i) अलमलं तव श्रमेण।

उत्तर- पुरुषाय

(ii) न अहं सोपानमागैरट्टमधिरोढुं विश्वसिमि।

उत्तर- पुरुषाय

(iii) चिन्तितं भवता न वा?

उत्तर- पुरुषाय

(iv) गुरुगृहं गत्वैव विद्याभ्यासो मया करणीयः।

उत्तर- तपोदत्ताय

(v) भवद्भिः उन्मीलितं मे नयनयुगलम्।

उत्तर- तपोदत्ताय

(ख) अधोलिखितानि कथनानि कः कं प्रति कथयति?

उत्तर- NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi

कथनानि-   कः   कम् प्रति  

  • हा विधे! किमिदं मया कृतम? तपोदत्तः  विधिम
  • भो महाशय! किमिदं विधीयते। तपोदत्तः पुरुषम्
  • भोस्तपस्विन्! कथं माम् उपरुणत्सि। पुरुषः तपोदत्तम्
  • सिकता: जलप्रवाहे स्थास्यन्ति किम्? तपोदत्तः पुरुषम्
  • नाहं जाने कोऽस्ति भवान्? तपोदत्तः पुरुषम

प्रश्न 5. स्थूलपदान्यधिकृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत

(क) तपोदत्तः तपश्चर्यया विद्यामवाप्तुं प्रवृत्तोऽसि।

उत्तर- तपोदत्त केन विधिना विद्यामवाप्तुं प्रवृत्तोऽस्ति?

(ख) तपोदत्तः कुटुम्बिभिः मित्रैः गर्हितः अभवत्।

उत्तर- कः कुटुम्बिभिः मित्रैः गर्हितः अभवत्?

(ग) पुरुषः नद्यां सिकताभिः सेतुं निर्मातुं प्रयतते।

उत्तर- पुरुषः कुत्र सिकताभिः सेतुं निर्मातुं प्रयतते?

(घ) तपोदत्तः अक्षरज्ञानं विनैव वैदुष्यमवाप्तम् अभिलषति?

उत्तर- तपोदत्तः कम् विनैव वैदुष्यमवाप्तुम् अभिलषति?

(ङ) तपोदत्तः विद्याध्ययनाय गुरुकुलम् अगच्छत्।

उत्तर- तपोदत्तः किमर्थं गुरुकुलं अगच्छत ।

(च) गुरुगृहं गत्वैव विद्याभ्यासः करणीयः।

उत्तर- कुत्र गत्वैव विद्याभ्यासः करणीयः?

प्रश्न 6. उदाहरणमनुसृत्य अधोलिखितविग्रहपदानां समस्तपदानि लिखत

उत्तर- विग्रहपदानि               समस्तपदानि

यथा- संकल्पस्य सातत्येन    संकल्पसातत्येन

उत्तर- NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi

  1. (क) अक्षराणां ज्ञानम् अक्षरज्ञानम्
  2. (ख) सिकतायाः सेतुः सिकतासेतुः
  3. (ग) पितुः चरणैः पितृचरणैः
  4. (घ) गुरोः गृहम् गुरुगृहम्
  5. (ङ) विद्यायाः अभ्यासः विद्याभ्यासः

(अ) उदाहरणमनुसृत्य अधोलिखितानां समस्तपदानां विग्रहं कुरुत

समस्तपदानि                 विग्रहः

यथा- नयनयुगलम्        नयनो: युगलम्

उत्तर- NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit

  1. (क) जलप्रवाहे     जलस्य प्रवाहे
  2. (ख) तपश्चर्यया तपसः चर्यया
  3. (ग) जलोच्छलनध्वनिः जलस्य उच्छलनस्य ध्वनिः
  4. (घ) सेतुनिर्माणप्रयासः सेतोः निर्माणस्य प्रयासः।

प्रश्न 7. उदाहरणमनुसृत्य कोष्ठकात् पदम् आदाय नूतनं वाक्यद्वयं रचयत

(क) यथा- अलं चिन्तया। (‘अलम्’ योगे तृतीया) |

(i)  ………………    …………… (भय)

(ii)  …………….  ………………. (कोलाहल)

उत्तर- (i) अलं    भयेन। (ii) अलं    कोलाहलेन।

(ख) यथा- माम् अनु स गच्छति। (‘अनु’ योगे द्वितीया)

  • ………….. ……….  ………..  …………. (गृह)
  • ……… ………..  ……….  ………….  (पर्वत)

उत्तर- (i) माम्  अनु  गृहं  गच्छति। (ii) माम्  अनु  पर्वतं  गच्छति।

(ग) यथा- अक्षरज्ञानं विनैव वैदष्यं प्राप्तमभिलषसि। (‘विना’ योगे द्वितीया)

  • ………… ……….  …………  ………….. (परिश्रम)
  • ……….. ………..  ………..  ………… (अभ्यास)

उत्तर- (i) परिश्रमं विनैव वैदुष्यं प्राप्तुमभिलषसि। (ii) अभ्यासं विनैव वैदुष्यं प्राप्तुमभिलषसि।

(घ) यथा- सन्ध्यां यावत् गृहमुपैति (‘यावत्’ योगे द्वितीया)

  • ………… ……….  …………  ………….. (मास)
  • ………… ……….  …………  ………….. (वर्ष)

उत्तर- (i) मासं यावत् गृहं उपैति। (ii) वर्षं यावत् गृहं उपैति।

अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

लघूत्तरात्मक प्रश्नोत्तर Class 9 Sanskrit

प्रश्न 1. तपोदत्तः बाल्ये कैः क्लेश्यमानोऽपि विद्या नाधीतवान्?

उत्तर- तपोदत्तः बाल्ये पितृचरणैः क्लेश्यमानोऽपि विद्या नाधीतवान्।

प्रश्न 2. परिधानैरलङ्कारैर्भषितोऽपि कः न शोभते?

उत्तर- परिधानैरलङ्कारैर्भषितोऽपि विद्याहीनः न शोभते।

प्रश्न 3. कीदृशः मार्गभ्रान्तः अपि वरम?

उत्तर- दिवसे मार्गभ्रान्तः सन्ध्यां यावद् यदि गृहमुपैति तदपि वरम्।

प्रश्न 4. जगति केषाम् अभावो नास्ति?

उत्तर- जगति मूर्खाणाम् अभावो नास्ति।

प्रश्न 5. रामः मकरालये कैः सेतुं बबन्ध?

उत्तर- रामः मकरालये शिलाभिः सेतुं बबन्ध।

प्रश्न 6. पुरुषः काभिः सेतुनिर्माणस्य प्रयासं करोति स्म?

उत्तर- पुरुषः सिकताभिः सेतुनिर्माणस्य प्रयासं करोति स्म?

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