Class 9 Hindi Chapter 6 Question Answer

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 6 Question Answer

प्रेमचन्द के फटे जूते (हरिशंकर परसाई) NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 6 Question Answer NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitiz Chapter 6 प्रेमचंद के फटे जूते with अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न Class 9 Hindi

प्रश्न 1. हरिशंकर परसाई ने प्रेमचन्द का जो शब्द-चित्र  हमारे सामने प्रस्तुत किया है, उससे प्रेमचन्द के व्यक्तित्व की कौन-कौनसी विशेषताएँ उभरकर आती हैं?

उत्तर प्रस्तुत शब्द-चित्र से प्रेमचन्द के व्यक्तित्व को निम्न विशेषताएँ व्यक्त होती हैं-

  • (1) उनका जीवन संकट एवं अभावों में व्यतीत हुआ।
  • (2) उन्हें दिखावा पसन्द नहीं था और किसी से माँगना अच्छा नहीं लगता था। उन्होंने जीवनभर मर्यादाओं का पालन किया।
  • (3) वे बाधाओं से बचकर नहीं, उनसे संघर्ष कर आगे बढ़ते थे।
  • (4) वे स्वाभिमानी थे, उनका स्वभाव समझौतावादी नहीं था।
  • (5) उनका व्यक्तित्व बाहर-भीतर एक जैसा सादगी और सहजता से भरा था।
  • (6) उन्होंने समाज में व्याप्त सदियों पुरानी मान्यताओं को ध्वस्त किया।

इस प्रकार प्रस्तुत व्यंग्य-निबन्ध से प्रेमचन्द के व्यक्तित्व को संघर्षशील, अपराजेय, मर्यादित, स्वाभिमानी, सादगीयुक्त एवं घिसी-पिटी परम्पराओं का विरोधी बताया गया है।

प्रश्न 2. सही कथन के सामने (सही) का निशान लगाइए-

(क) बाएँ पाँव का जूता ठीक है मगर दाहिने जूते में छेद हो गया है जिसमें से अंगुली बाहर निकल आयी है।

(ख) लोग तो इत्र चुपड़कर फोटो खिंचवाते हैं जिससे फोटो में खुशबू आ जाए।

(ग) तुम्हारी यह व्यंग्य-मुस्कान मेरे हौसले बढ़ाती है।

(घ) जिसे तुम घृणित समझते हो, उसकी तरफ अंगूठे से इशारा करते हो।

उत्तर (क) (सही), (ख) (सही), (ग) (गलत), (घ) (गलत)

प्रश्न 3. नीचे दी गई पंक्तियों में निहित व्यंग्य को स्पष्ट कीजिए-

( क ) जूता हमेशा टोपी से कीमती रहा है। अब तो जूते की कीमत और बढ़ गई है और एक जूते पर पचीसों टोपियाँ न्यौछावर होती हैं।

उत्तर व्यंग्य-टोपी सम्मान की प्रतीक और जूता सामर्थ्य या अधिकार का प्रतीक है। व्यंग्य यह है कि शक्तिशाली व्यक्ति के चरणों में अनेक लोग झुकते हैं। आज की दुनिया में गुणी लोग भी अपने स्वाभिमान को भुलाकर शक्तिशाली अर्थात् धनवान लोगों की सेवा में खड़े रहते हैं। जूता देना एक मुहावरा भी है। इस तरह अब जूतों की कीमत बढ़ गई हैं।

(ख) तुम परदे का महत्त्व नहीं जानते, हम परदे पर कुर्बान हो रहे हैं।

उत्तर व्यंग्य-लोगों के द्वारा असलियत को छिपाने की प्रवृत्ति पर व्यंग्य है। लोग अपनी बुराइयों को ढकने का निरन्तर प्रयास करते हैं, परन्तु प्रेमचन्द के पास परदे में छिपाने लायक कुछ भी नहीं था। वे स्वभाव से जैसे बाहर थे, वैसे ही भीतर भी थे।

(ग) जिसे तुम घृणित समझते हो, उसकी तरफ हाथ की नहीं, पाँव की अंगुली से इशारा करते हो।

उत्तर व्यंग्य-व्यक्ति जिन चीजों को घृणा योग्य समझता है, उनकी तरफ हाथ की बजाय पाँव की अंगुली से इशारा करता है। प्रेमचन्द ने भी जिसे समाज में घृणा योग्य समझा उसकी ओर अपने पाँव की अंगुली से इशारा किया  अर्थात  उसे अपने जूते की नोक पर रखा , उसके विरुद्ध संघर्ष किया।

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प्रश्न 4. पाठ में एक जगह पर लेखक सोचता है कि ‘फोटो खिंचाने की अगर यह पोशाक है तो पहनने की कैसी होगी?‘ लेकिन अगले ही पल में वह विचार बदलता है कि ‘नहीं, इस आदमी की अलग-अलग पोशाकें नहीं होंगी।’ आपके अनुसार इस सन्दर्भ में प्रेमचन्द के बारे में लेखक के विचार बदलने की क्या वजहें हो सकती हैं?

उत्तर लेखक ने पहले सोचा कि संसार में अधिकतर लोग अपने घर पर पहनने के और बाहर पहनने के कपड़ों में अन्तर रखते हैं। परन्तु प्रेमचन्द का व्यक्तित्व सादगी भरा था। वे जैसे बाहर थे वैसे ही मन से भी थे। प्रायः देखने में आता है कि लोगों के व्यक्तित्व में एकरूपता नहीं होती है। इस कारण वे दिखाई कुछ देते हैं और होते कुछ और हैं। फिर लेखक ने सोचा कि प्रेमचन्द के व्यक्तित्व में ऐसी भिन्नता या बनावटीपन नहीं हो सकता। वे तो सदा एक जैसे सहज रहे। इसी से लेखक ने अपना विचार बदला।

उक्त विचार बदलने का अन्य कारण यह भी व्यंजित हुआ है कि प्रेमचन्द का जीवन अर्थाभाव से ग्रस्त रहा। इस कारण उनके पास पोशाकों की भी कमी रही होगी और वे अलग-अलग पोशाकें नहीं पहन सके होंगे। एक महान साहित्यकार के जीवन में यह विडम्बना की बात थी।

प्रश्न 5. आपने यह व्यंग्य पढ़ा। इसे पढ़कर आपको लेखक की कौनसी बातें आकर्षित करती हैं?

उत्तर प्रस्तुत पाठ को पढ़कर लेखक की निम्नलिखित बातें आकर्षित करती हैं-

(1) लेखक सफल व्यंग्यकार है, वह प्रेमचन्द जैसे महान साहित्यकार पर व्यंग्य करने से नहीं डरता है।

(2) लेखक ने सरल एवं सजीव भाषा का प्रयोग कर सुन्दर शब्द-चित्र उपस्थित किया है तथा प्रेमचन्द के स्वभाव का सहजता से उद्घाटन किया है।

(3) लेखक ने दोहरा व्यक्तित्व रखने वालों पर तथा स्वाभिमान का ध्यान न रखने वालों पर आक्षेप किया है।

(4) लेखक स्पष्टवादी एवं सत्यवादी है। वह महान् साहित्यकारों की आर्थिक दशा को लेकर चिन्तित दिखाई देता है।

(5) लेखक को वर्तमान काल की अवसरवादी प्रवृत्ति का पूरा ज्ञान है और वह ऐसी स्थिति पर व्यंग्य करना  चाहता  है।

प्रश्न 6. पाठ में ‘टीले’ शब्द का प्रयोग किन सन्दर्भों को इंगित करने के लिए किया गया होगा?

उत्तर प्रस्तुत पाठ में ‘टीले’ से तात्पर्य है मार्ग की रुकावटें अथवा बाधा उपस्थित करने वाले लोग, सामन्तवादी और परातनपंथी लोग। टीले पर ठोकर मारने का उल्लेख करने से लेखक ने बाधक तत्त्वों जैसे—तत्कालीन समाज में व्याप्त शोषण की प्रवृत्ति, अन्याय, छुआछूत, जाति-पांति आदि बुराइयों को ध्वस्त करने का संकेत किया है। सुविधाभोगी लेखक ऐसे तत्त्वों से समझौता कर लेते हैं, या उन्हें अनदेखा कर बगल से आगे निकल जाते हैं, लेकिन प्रेमचन्द का स्वभाव समझौतावादी नहीं था, वे तो सामने से ठोकर मारकर बाधक तत्त्वों को ध्वस्त करना चाहते थे।

रचना और अभिव्यक्ति- Class 9 Hindi Chapter 6

प्रश्न 7. प्रेमचन्द के फटे जूते को आधार बनाकर परसाईजी ने यह व्यंग्य लिखा है। आप भी किसी व्यक्ति की पोशाक को आधार बनाकर एक व्यंग्य लिखिए।

उत्तर स्वदेशी आन्दोलन को लक्ष्य कर गाँधीजी ने नेताओं से खद्दर पहनने के लिए कहा। फलस्वरूप तब से स्वयं को सच्चा गाँधीवादी जनसेवक दिखाने के लिए झक सफेद खद्दर पहनने की परम्परा बन गई है।

वस्तुतः जनता को दिखाने के लिए नेतागण सफेद बेदाग कपड़े पहनते हैं, परन्तु जनसेवा के नाम पर वे कितने काले कारनामे करते हैं, कितनी भेंट-पूजा डकार जाते हैं, यह अब आम जनता को मालूम है। वे संसद में किसी की माँग या समस्या को उठाने के लिए मोटी रकम चुपचाप डकार लेते हैं। जन-कल्याण के कार्यक्रमों के लिए आवण्टित धन को काले तरीकों से हजम कर जाते हैं।

इस तरह वे अन्दर से काले, स्वार्थी एवं भ्रष्ट रहते हैं, जबकि बाहर से उजले, जनहितकारी एवं बेदाग खद्दरधारी बनते फिरते हैं। ऐसे नेताओं का चरित्र तो अन्दर से कुछ और बाहर से कुछ और रहता है।

प्रश्न 8. आपकी दृष्टि से वेश-भूषा के प्रति लोगों की सोच में आज क्या परिवर्तन आया है?

उत्तर आज वेश-भूषा के प्रति लोगों की सोच में काफी परिवर्तन आया है। वस्तुतः वेश-भूषा से व्यक्तित्व का पता चलता है; उसके स्वभाव, आचरण, आर्थिक एवं सामाजिक प्रतिष्ठा, मानसिक स्थिति, रुचि आदि का पता चलता है।

आजकल लोग वेश-भूषा के प्रति अधिक सतर्क रहते हैं। यथासम्भव अच्छी काट के और नये फैशन के कपड़े पहनते हैं, जूतों के पहनावे में भी काफी सतर्कता दिखाते हैं। सामान्य गरीब लोग भी जितना सम्भव हो, ठीक-ठाक ढंग की वेशभूषा अपनाने का प्रयास करते हैं। अब लोग वेशभूषा को आर्थिक सम्पन्नता, शिष्ट आचरण एवं सभ्यता से जोड़कर देखते हैं, तो कुछ लोग दिखावा भी करते हैं।

भाषाअध्ययन- Premchand Ke Phate Jute

प्रश्न 9. पाठ में आये मुहावरे छाँटिए और उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए।

उत्तर पाठ में काफी मुहावरे प्रयुक्त हुए हैं, यथा—कुर्बान होना, जूता आजमाना, हौसले पस्त होना, दृष्टि अटकना, रो पड़ना, परदा होना, पछतावा होना, टीला खड़ा होना, पहाड़ फोड़ना, उँगली से इशारा करना, चक्कर काटना, जूते घिसना इत्यादि । इनमें कुछ के वाक्य-प्रयोग-

कुर्बान होना न्यौछावर होना। वाक्य जब भारतवासी अपने देश पर कुर्बान हुए, तभी हमें आजादी मिली।

ठोकर मारना चोट मारना, अपमानित करना। वाक्य व्यक्तिगत सुख-भोग की लालसा को ठोकर मारने वाले ही महापुरुष बनते हैं।

पहाड़ फोड़ना बाधाएँ नष्ट करना। वाक्य नदियों की तरह पहाड़ फोड़कर आगे बढ़ने वाले ही जीवन में प्रगति कर पाते हैं।

हौसले पस्त होना उत्साह कम होना। वाक्य निरन्तर बढ़ती महंगाई को देखकर अब मध्यमवर्ग के हौसले पस्त हो रहे हैं।

टीला खड़ा होना बाधाएँ आना, रुकावट आना। वाक्य वर्तमान में मानव सभ्यता के विकास में अनेक टीले खड़े हो रहे हैं।

प्रश्न 10. प्रेमचन्द के व्यक्तित्व को उभारने के लिए लेखक ने जिन विशेषणों का उपयोग किया है, उनकी सूची बनाइए।

उत्तर प्रेमचन्द के लिए विशेषण- साहित्यिक पुरखे, महान् कथाकर, उपन्यास सम्राट्, युग प्रवर्तक, मेरी जनता के लेखक।

अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न प्रेमचन्द के फटे जूते

अर्थग्रहण सम्बन्धी प्रश्न

निर्देशनिम्नलिखित गद्यांशों को पढ़कर उनसे सम्बन्धित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

(1) Class 9 Hindi Chapter 6 Question Answer

मैं चेहरे की तरफ देखता हूँ। क्या तुम्हें मालूम है, मेरे साहित्यिक पुरखे कि तुम्हारा जूता फट गया है और अंगुली बाहर दिख रही है? क्या तुम्हें इसका जरा भी एहसास नहीं है? जरा लज्जा, संकोच या झेंप नहीं है? क्या तुम इतना भी नहीं जानते कि धोती को थोडा नीचे खींच लेने से अंगुली ढक सकती है? मगर फिर भी तम्हारे चेहरे पर बड़ी बेपरवाही, बड़ा विश्वास है।

फोटोग्राफर ने जब ‘रेडी प्लीज’ कहा होगा, तब परम्परा के अनुसार तुमने मुस्कान लाने की कोशिश की होगी, दर्द के गहरे कुएँ के तल में वहीं पड़ी मुस्कान को धीरे-धीरे खींचकर ऊपर निकाल रहे होंगे कि बीच में ही ‘क्लिक’ करके फोटोग्राफर ने ‘Thank you’ कह दिया होगा। विचित्र है यह अधूरी मुस्कान। इसमें मुसकान नहीं, उसमें उपहास है, व्यंग्य है।

प्रश्न- Class 9 Hindi Chapter 6 Question Answer

प्रश्न 1. लेखक ने ‘साहित्यिक पुरखे’ किसके लिए कहा है?

प्रश्न 2. प्रेमचन्द की मुसकान अधूरी क्यों रह गई?

प्रश्न 3. प्रेमचन्द अपनी अंगुली कैसे ढक सकते थे?

प्रश्न 4. इस गद्यांश से प्रेमचन्द की किस विशेषता का पता चलता है?

उत्तर– Class 9 Hindi Chapter 6 Question Answer Premchand Ke Phate Jute

  1. लेखक ने मुंशी प्रेमचन्द को ‘साहित्यिक पुरखे’ कहा है।
  2. फोटो खिंचाते समय फोटोग्राफर ने प्रेमचन्द से मुसकराने के लिए कहा। तब उन्होंने उसके कथनानुसार मुसकराने की कोशिश की होगी और धीरे-धीरे चेहरे पर मुसकान ला रहे होंगे कि तभी फोटोग्राफर ने फोटो खींच लिया। इस तरह प्रेमचन्द के पूर्णतया न मुस्करा पाने से उनकी मुसकान अधूरी रह गई।
  3. फोटो खिंचवाते समय प्रेमचन्द अपनी धोती को यदि थोड़ा-सा नीचे की ओर खींच लेते, अर्थात् सिद्धान्तों से समझौता कर लेते, तो अंगुली ढक सकती थी। नया जूता पहनकर भी वे अपने पैर की अंगुली ढक सकते थे।
  4. इस गद्यांश से प्रेमचन्द की इस विशेषता का पता चलता है कि वे सरल और सहज स्वभाव वाले व्यक्ति थे। वे वास्तव में जैसे थे, वैसे ही दिखाना चाहते थे। वे अपनी वेश-भूषा एवं बाहरी पहनावे के प्रति बेपरवाह रहते थे क्योंकि वे गम्भीर स्वभाव के एवं विचारों में डूबे हुई से दिखाई देते थे।

(2) Class 9 Hindi Chapter 6 Question Answer

यह कैसा आदमी है, जो खुद तो फटे जूते पहने फोटा खिंचा रहा है, पर किसी पर हँस भी रहा है। फोटो ही खिंचाना था, तो ठीक जूते पहन लेते या न खिंचाता। फोटो न खिंचाने से क्या बिगड़ता था। शायद पत्नी का आग्रह रहा हो और तुम ‘अच्छा, चल भई’ कहकर बैठ गये होंगे। मगर यह कितनी बड़ी ‘ट्रेजडी’ है कि आदमी के पास फोटो खिंचाने को भी जूता न हो। मैं तुम्हारी यह फोटो देखते-देखते, तुम्हारे क्लेश को अपने भीतर महसूस करके जैसे रो पड़ना चाहता हूँ, मगर तुम्हारी आँखों का यह तीखा दर्द-भरा व्यंग्य मुझे एकदम रोक देता है।

प्रश्न- Class 9 Hindi Chapter 6 Question Answer

प्रश्न 1. यदि प्रेमचन्द को फोटो का महत्त्व ज्ञात होता, तो वे क्या करते?

प्रश्न 2. गद्यांश में प्रेमचन्द द्वारा फोटो खिंचवाने का क्या कारण बताया गया है?

प्रश्न 3. फोटो को देखकर लेखक क्या करना चाहता हुआ भी नहीं कर पाता है?

प्रश्न 4. गद्यांश में लेखक ने किस ‘ट्रेजडी’ की ओर संकेत किया है?

उत्तर– Class 9 Hindi Chapter 6 Question Answer Premchand Ke Phate Jute

  1. उत्तर-1. यदि प्रेमचन्द को फोटो का महत्त्व ज्ञात होता, तो वे अपनी धोती नीचे की ओर सरका कर फटे जूते को ढक लेते या फोटो खिंचाने के लिए किसी से जूता माँग कर पहन लेते।
  1. फोटो खिंचवाने का यह कारण बताया गया है कि प्रेमचन्द को न चाहते हुए भी पत्नी का आग्रह मानना पड़ा होगा।
  2. फोटो को देखकर लेखक को महसूस होता है कि प्रेमचन्द किसी बड़े क्लेश से आक्रान्त थे, उनके हृदय में कोई दर्द भरा था। इस बात पर लेखक रोना चाहता था, परन्तु प्रेमचन्द की फोटो में उनकी आँखों में भरे हुए तीखे व्यंग्य को देखकर वह वैसा नहीं कर पाता है।
  3. प्रेमचन्द जैसे महान साहित्यकार के पास आर्थिक दशाहीनता के कारण फोटो खिंचवाने के लिए एक जोड़ी अच्छे जूते नहीं थे और पत्नी के आग्रह पर फटे हुए जूते में ही फोटो खिंचवाने को विवश रहे । यह सबसे बड़ी ट्रेजडी थी, जिस और लेखक ने संकेत किया है।

(3) Class 9 Hindi Chapter 6 Question Answer

टोपी आठ आने में मिल जाती है और जूते उस जमाने में भी पाँच रुपये से कम में क्या मिले होंगे। जूता हमेशा टोपी से कीमती रहा है। अब तो जूते की कीमत और बढ़ गई है और एक जूते पर पचीसों टोपियाँ न्यौछावर होती हैं। तुम भी जूते और टोपी के आनुपातिक मूल्य के मारे हुए थे। यह विडम्बना मुझे इतनी तीव्रता से पहले कभी नहीं चुभी, जितनी आज चुभ रही है, जब मैं तुम्हारा फटा जूता देख रहा हूँ। तुम महान् कथाकार, उपन्यास-सम्राट्, युग-प्रवर्तक, जाने क्या-क्या कहलाते थे, मगर फोटो में भी तुम्हारा जूता फटा हुआ है।

प्रश्न- Class 9 Hindi Chapter 6 Question Answer

प्रश्न 1. टोपी और जूते के मूल्य में क्या सम्बन्ध रहा है?

प्रश्न 2. ‘एक जूते पर पचीसों टोपियाँ न्यौछावर हो रही हैं’-इसका आशय स्पष्ट कीजिए।

प्रश्न 3. प्रस्तुत गद्यांश में टोपी और जूते के माध्यम से क्या व्यंग्य किया गया है?

प्रश्न 4. हमारे देश में साहित्यकारों के साथ क्या विडंबना है?

उत्तर- Class 9 Hindi Chapter 6 Question Answer Premchand Ke Phate Jute

  1. उत्तर-1. टोपी और जूते के मूल्य में अनुपातिक सम्बन्ध रहा है, अर्थात् टोपी की कीमत सदैव जूते की कीमत से कम रही है। कहने का आशय यह है कि प्रेमचन्द टोपी के समान देश के सम्मानित साहित्यकार थे लेकिन वे जूते के सामने अर्थात् धनी लोगों के सामने झुके नहीं। उन्हें गरीबी में ही जीवन यापन करना पड़ा।
  2. इसका आशय यह है कि वर्तमान भौतिकतावादी युग में धनवानों अर्थात् वैभव-सम्पन्न लोगों को सम्मान के योग्य माना जाता है। अब गुणवान लोगों को भी पैसे वालों के सामने मजबूरी में झुकना पड़ता है।
  3. प्रस्तुत गद्यांश में टोपी और जूते के माध्यम से यह व्यंग्य किया गया है कि समाज में टोपी अर्थात् इज्जत एवं गुणों को अब उतना महत्त्व नहीं दिया जाता है। अब जूते अर्थात् आर्थिक दृष्टि से सम्पन्न या ताकतवर को ही श्रेष्ठ माना जाता है। अतः गुणी को धनी से कमतर मानने पर व्यंग्य किया गया है।
  4. हमारे देश में न तो साहित्यकारों को मान-सम्मान मिलता है और न धन। प्रेमचन्द जैसे महान साहित्यकार लेखन से अपनी आजीविका नहीं कमा पाए। यह बहुत बड़ी विडंबना है।

बोधात्मक प्रश्न- Premchand Ke Phate Jute

प्रश्न 1. प्रेमचन्द की फोटो में उनके जूते देखकर लेखक क्या सोचने लगता है?

उत्तर प्रेमचन्द की फोटो में उनके बेतरतीब बँधे जूतों को और बाएँ पैर के फटे जूते को देखकर लेखक सोचने लगता  है कि जिस आदमी की फोटो खिंचाने की अगर यह पोशाक है, तो प्रतिदिन पहनने की पोशाक कैसी होगी? क्या इस आदमी के पास अलग-अलग पोशाकें नहीं होंगी या इसमें पोशाकें बदलने का गुण नहीं होगा?

प्रश्न 2. लेखक ने अपने तथा प्रेमचन्द के जूतों में क्या अन्तर बताया? निबंध के आधार पर लिखिए।

उत्तर लेखक प्रेमचन्द की फोटो के आधार पर बताता है कि उनके जूते केनवस के थे, उनके बन्द के सिरों पर लोहे की पतरी निकल आयी थी। उनके दाहिने पैर का जूता ठीक था, परन्तु बायें पैर के जूते में बड़ा छेद हो गया था, जिसमें से एक अंगुली बाहर निकल आई थी। लेखक बताता है कि मेरा जूता ऊपर से अच्छा दिखता है, इसमें से अंगुली बाहर तो नहीं निकलती है, परन्तु अंगूठे के नीचे का तला फटा हुआ है, इस कारण अंगूठा जमीन से घिसता रहता है और पैनी मिट्टी की रगड़ खाकर लहूलुहान हो जाता है। इस प्रकार लेखक ने अपने और प्रेमचन्द के जूतों में काफी अन्तर बताया है।

प्रश्न 3. जो लोग फोटो का महत्त्व समझते हैं, लेखक के अनुसार वे क्या करते हैं?

उत्तर- जो लोग फोटो का महत्त्व समझते हैं, वे लोग अपनी फोटो को सुन्दर सी बनाने के लिए किसी से जूते, कोट आदि परिधान माँग लेते हैं। यहाँ तक उधार की बीबी तक माँग लेते हैं। कई लोग तो फोटो खिंचवाने के लिए इत्र लगाकर बैठते हैं ताकि फोटो में भी उसकी खुशबू आ जाए।

प्रश्न 4. कुम्भनदास कौन थे? उनका जूता कैसे घिस गया था?

उत्तर कुम्भनदास भक्ति-काल में कृष्ण-भक्ति शाखा में अष्टछाप के कवि एवं वल्लभाचार्य के शिष्य थे। एक बार बादशाह अकबर के बुलावे पर वे उनसे मिलने फतेहपुर सीकरी गये थे। वह स्थान उनके निवास से काफी दूर था। इस कारण फतेहपुर सीकरी जाने व लौट आने में उनके जूते घिस गये थे। इसीलिए उन्होंने कहा कि, “आवत-जात पन्हैया घिस गई, बिसर गयो हरि नाम।” अर्थात् फतेहपुर सीकरी आते-जाते पैरों की जूतियाँ तो घिसी ही, ईश्वर के नाम-स्मरण में भी बाधा पड़ी।

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