Class 9 Hindi Chapter 5 Question Answer

Class 9 Hindi Chapter 5 Question Answer

नाना साहब की पुत्री देवी मैना को भस्म कर दिया गया

(चपला देवी)

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1. बालिका मैना ने सेनापति ‘हे’ को कौन-कौन से तर्क देकर महल की रक्षा के लिए प्रेरित किया?

उत्तर बालिका मैना ने सेनापति ‘हे’ को तर्क दिया कि अंग्रेजों के विरुद्ध जिन्होंने शस्त्र उठाये हैं, वे दोषी हैं। पर इस जड़ पदार्थ मकान ने आपका क्या अपराध किया है? इस महल का कोई दोष नहीं है और यह महल मुझे बहुत ही प्रिय है। आपकी पुत्री ‘मेरी’ से मेरी मित्रता थी, उसके साथ आप भी पहले यहाँ आया करते थे।

प्रश्न 2. मैना जड़ पदार्थ मकान को बचाना चाहती थी पर अंग्रेज उसे नष्ट करना चाहते थे। क्यों?

उत्तर मैना उस जड़ पदार्थ महल (मकान) में ही पैदा हुई थी। उसी में पली-बढ़ी थी। उसी में उसकी बचपन की, पिता की और परिवार की यादें जुड़ी थीं। इसलिए वह उसे बहुत प्रिय था। अंगरेजों के लिए वह महल उनके दुश्मन नाना साहब की पहचान था। वे अपने दुश्मन की निशानी को मिट्टी में मिला देना चाहते थे ताकि फिर कोई अंगरेज़ों के खिलाफ आवाज़ न उठा सके।

प्रश्न 3. सर टामस ‘हे’ के मैना पर दया-भाव के क्या कारण थे?

उत्तर सर टामस ‘हे’ के मैना पर दया भाव के निम्न कारण थे।

(i) सर टामस ‘हे’ स्वभाव से दयालु थे और वे मैना को पहचानते थे। इसीलिए वे उसे देखकर ठहर गये थे और उसमें रुचि लेने लगे थे।

(ii) मैना उनकी मृत बेटी ‘मेरी’ की बचपन की सहेली थी। इस नाते वे भी उसके साथ उसके घर आया करते थे। इन सम्बन्धों को याद कर ‘हे’ के मन में ममता जाग उठी थी।

(iii) मैना ने अपनी करुणापूर्ण बातों से ‘हे’ के मन में दयाभाव जगा दिया था।

प्रश्न 4. मैना की अन्तिम इच्छा थी कि वह उस प्रासाद के ढेर पर बैठकर जी भर रो ले, लेकिन पाषाण हृदय वाले जनरल ने किस भय से उसकी इच्छा पूर्ण न होने दी?

उत्तर अंग्रेज सरकार नाना साहब को अपना कट्टर दुश्मन मानती थी और उनका प्रत्येक स्मृति-चिह्न मिटा देना चाहती थी। जनरल अउटरम को भय था कि मैना पर दिखाई गई जरा-सी सहानुभूति से वह अंग्रेज़ सरकार का कोप-भाजन बन सकता है, साथ ही वह मैना को तुरन्त गिरफ्तार करके सरकार से वाहवाही और पुरस्कार पाना चाहता था। इन सब कारणों से अउटरम ने मैना की इच्छा पूर्ण न होने दी और उसे बन्दी बना लिया।

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प्रश्न 5. बालिका मैना के चरित्र की कौन-कौनसी विशेषताएँ आप अपनाना चाहेंगे और क्यों?

उत्तर बालिका मैना के चरित्र की सभी विशेषताएँ अतीव प्रेरणादायी हैं। हम उसके चरित्र की इन विशेषताओं को अपनाना चाहेंगे।

(1) देश-प्रेम-निडरता- बालिका मैना देश-प्रेमी और निडर बालिका थी। जब सेनापति ‘हे’ अपने सैनिकों के साथ राजमहल तोड़ने आया तब उसने निडरता के साथ उसका सामना करके राजमहल न तोड़ने की प्रार्थना की।

(2) स्वगृह-प्रेम- मैना के मन में अपने गृह राजमहल के प्रति स्वाभाविक प्रेम था। वह उसके टूटने का दुःख सहन नहीं कर पायी इसलिए वह टूटे महल के ढेर पर बैठकर रोना चाहती थी। उसका स्वगृह प्रेम अनुकरणीय था।

प्रश्न 6. ‘टाइम्स’ पत्र ने 6 सितम्बर को लिखा था। “बड़े दुःख का विषय है कि भारत सरकार आज तक दुर्दान्त  नाना साहब को नहीं पकड़ सकी।” इस वाक्य में ‘भारत सरकार’ से क्या आशय है?

उत्तर इस वाक्य में ‘भारत सरकार’ का आशय तत्कालीन ब्रिटिश सरकार अथवा अंगरेज़ सरकार से है।

रचना और अभिव्यक्ति Class 9 Hindi Chapter 5

प्रश्न 7. स्वाधीनता आन्दोलन को आगे बढ़ाने में इस प्रकार के लेखन की क्या भूमिका रही होगी?

उत्तर स्वाधीनता आन्दोलन को आगे बढ़ाने में इस प्रकार के लेखन की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही होगी। ऐसे लेखन से अंगरेज़ सरकार तथा उनके सैनिकों के द्वारा भारतीयों पर किये जा रहे अत्याचारों को पढ़कर लोगों के मन में अंगरेज़ों के प्रति नफरत एवं विद्रोह की भावना बढ़ी होगी। साथ ही स्वतन्त्रतापूर्वक सम्मानित जीवन जीने और देश को शीघ्रातिशीघ्र स्वाधीन कराने की प्रेरणा प्राप्त हुई होगी।

इतिहास का अवलोकन करने से भी ज्ञात होता है। कि ऐसे ही लेखन से जनता में आजादी प्राप्त करने का जोश बढ़ता गया और अनेक लोग स्वतन्त्रता आन्दोलन में सक्रिय भाग लेने लगे। ऐसे लेखन ने जन-जागृति एवं देशभक्ति के प्रसार का काम किया।

प्रश्न 8. कल्पना कीजिए कि मैना के बलिदान की यह खबर आपको रेडियो पर प्रस्तुत करनी है। इन सूचनाओं के आधार पर आप एक रेडियो समाचार तैयार करें और कक्षा में भावपूर्ण शैली में पढ़ें।

उत्तर यह आकाशवाणी का ………… केन्द्र है। कानपुर से हमारे संवाददाता ने अभी खबर भेजी है कि कल देर रात कानपुर किले में अंगरेज़ सेना द्वारा एक अमानवीय कृत्य किया गया। प्रसिद्ध स्वाधीनता सेनानी नाना साहब धुन्धूपन्त की पुत्री मैना देवी को आग के हवाले कर दिया गया। बालिका मैना ने अंगरेज़ सैनिकों से अपने प्राणों की भीख मांगने से इनकार कर दिया। जनरल अउटरम ने इस कृत्य में मुख्य भूमिका निबाही और ब्रिटिश शासन का आदेश बताकर इस कुकृत्य पर लीपापोती का प्रयास किया।

कानपुर की जनता में जब अग्निकाण्ड का समाचार फैला, तो वह महल की ओर दौड़ पड़ी, परन्तु तब तक मैना का शरीर भस्म हो गया था। उस दृश्य को देखकर जनता ने इस बालिका को बलिदानी देवी मानकर प्रणाम किया और अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। इस घटना से भारतीयों में आक्रोश-विरोध का स्वर बढ़ने लग गया। सभी अंगरेजों की घोर निन्दा कर रहे।

प्रश्न 9. इस पाठ में रिपोर्ताज के प्रारम्भिक रूप की झलक मिलती है, लेकिन आज अखबारों में अधिकांश खबरें रिपोर्ताज की शैली में लिखी जाती हैं। आप-

(क) कोई दो खबरें किसी अखबार से काटकर अपनी कॉपी में चिपकाइए तथा कक्षा में पढ़कर सुनाइए।

उत्तर छात्र उपलब्ध अखबार को काटकर स्वयं करें।

(ख) अपने आसपास की किसी घटना का वर्णन रिपोर्ताज शैली में कीजिए।

उत्तर अजमेर रोड, जयपुर की पॉश कालोनी श्यामनगर के दो घरों से गुरुवार की रात करीब पच्चीस लाख रुपये का माल चोरों ने उड़ा लिया। शहर में सप्ताह भर के भीतर इस तरह की दूसरी घटना है। पुलिस के अनुसार आधी रात में चोर शान्तनु शर्मा और मनीष गुप्ता के घर में पिछे से घुसे और खिड़कियों की जालियाँ-ग्रिलें तोड़कर घरों में प्रविष्ट हुए। वहाँ से चोर कीमती आभूषणों के साथ नकद रुपये उठाकर ले गये। सुबह जाग होने पर मकान-मालिकों को चोरी का पता चला। लोगों का मानना है कि यह काम कालोनी में ठेली लेकर घूमने वाले शातिर बंगलादेशी गिरोह का है।

प्रश्न 10. आप किसी ऐसे बालक/बालिका के बारे में एक अनुच्छेद लिखिए जिसने कोई बहादुरी का काम किया हो।

उत्तर अजमेर-किशनगढ़ के बीच में एक छोटा-सा गाँव है, जिसमें ज्यादातर कच्चे मकान एवं झोंपड़े हैं। उस गाँव के एक गरीब घर में किशनी का जन्म हुआ। वह पाँचवीं तक ही स्कूल जा पायी। पिछली बार गर्मियों के दिनों में आँधी-लू के कारण सारा वातावरण तप रहा था। ऐसे में एक दिन गंगाराम के कच्चे झोंपड़े में आग लग गई। सुबह ग्यारह बजे का समय था। सब बूढ़े-बड़े लोग अपने-अपने काम पर चले गये थे।

गंगाराम के घर में तीन साल का बच्चा सो रहा था। आग लगने पर उसे चेत नहीं हुआ। कुछ बच्चों को जब पता चला कि अन्दर सोया हुआ बालक आग से घिर गया है, तो किशनी ने सभी  बच्चों को आग बुझाने में लगाया, वह स्वयं साहस करके  गंगाराम के झोंपड़े में गई और आग से घिरे हुए बालक को गोद में उठाकर बाहर ले आयी। इस काम में वह स्वयं भी काफी झुलस गई फिर भी उसने साहस का परिचय दिया। उसके प्रयास से आग और झोंपड़ों तक नहीं गयी। उस बालिका की बहादुरी देखकर ग्राम-प्रधान ने उसका नाम राज्य सरकार को प्रेषित किया। फलस्वरूप उसे इस गणतन्त्र दिवस पर राज्य सरकार द्वारा वीर बालिका सम्मान दिया गया है।

भाषाअध्ययन Class 9 Hindi Chapter 5

प्रश्न 11. भाषा और वर्तनी का स्वरूप बदलता रहता है। इस पाठ में हिन्दी गद्य का प्रारम्भिक रूप व्यक्त हुआ है। जो लगभग 75-80 वर्ष पहले था। इस पाठ के किसी पसंदीदा अनुच्छेद को वर्तमान मानक हिन्दी रूप में लिखिए।

उत्तर कानपुर में नृशंस हत्याकाण्ड के बाद अंगरेज़-सैनिको का दल बिठूर गया। वहाँ उन्होंने नाना साहब के राजमहल को लूटा, परन्तु उसमें थोड़ी ही सम्पत्ति अंगरेजों के हाथ लगी। अंगरेज़ों ने उस महल को भस्म करने का निश्चय कर वहाँ तोपें लगायीं। उसी समय महल के बरामदे में एक सुन्दर बालिका आकर खडी हुई। उसे देखकर अंगरेज़ सेनापति को अत्यधिक आश्चर्य हुआ, क्योंकि महल लूटते समय वह बालिका वहाँ कहीं भी नहीं दिखाई दी थी।

पाठेतर सक्रियता Class 9 Hindi Chapter 5

  • अपने साथियों के साथ मिलकर बहादुर बच्चों के बारे में जानकारी देने वाली पुस्तकों की सूची बनाइए।

उत्तर शिक्षार्थी स्वयं अध्यापक की सहायता से सूची तैयार करें।

  • इन पुस्तकों को पढ़िए-

भारतीय स्वाधीनता संग्राम में महिलाएँ- राजमकृष्णन, नेशनल बुक ट्रस्ट, नई दिल्ली, ‘1857 की कहानियाँ’- ख्वाजा हसन निजामी।

उत्तर शिक्षार्थी पुस्तकालय से लेकर इन पुस्तकों को पढ़ें।

अपठित गद्यांश को पढ़कर दिये गये प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

आजाद भारत में दुर्गा भाभी को उपेक्षा और आदर दोनों मिले। सरकारों ने उन्हें पैसों से तोलना चाहा। कई वर्ष पहले पंजाब में उनके सम्मान में आयोजित एक समारोह में तत्कालीन मुख्यमंत्री दरबारा सिंह ने उन्हें 51 हजार रुपये भेंट किए। भाभी ने वे रुपये वहीं वापस कर दिए। कहा- “जब हम आजादी के लिए संघर्ष कर रहे थे, उस समय किसी व्यक्तिगत लाभ या उपलब्धि की अपेक्षा नहीं थी। केवल देश की स्वतंत्रता ही हमारा ध्येय था।

उस ध्येय पथ पर हमारे कितने ही साथी अपना सर्वस्व निछावर कर गए, शहीद हो गए। मैं चाहती हूँ कि मुझे जो 51 हजार रुपये दिये गये हैं, उस धन से यहाँ शहीदों का एक बड़ा स्मारक बना दिया जाए, जिसमें क्रान्तिकारी आन्दोलन के इतिहास का अध्ययन और अध्यापन हो, क्योंकि देश की नई पीढी को इसकी बहुत आवश्यकता है।”

मुझे याद आता है सन् 1937 का ज़माना, जब कुछ क्रांतिकारी साथियों ने गाजियाबाद तार भेजकर भाभी से चुनाव लड़ने की प्रार्थना की थी। भाभी ने तार से उत्तर दिया-“चुनाव में मेरी कोई दिलचस्पी नहीं है। अतः लड़ने का प्रश्न ही नहीं उठता।”

मुल्क के स्वाधीन होने के बाद की राजनीति भाभी को कभी रास नहीं आई। अनेक शीर्ष नेताओं से निकट संपर्क होने के बाद भी वे संसदीय राजनीति से दूर ही बनी रहीं। शायद इसलिए अपने जीवन का शेष हिस्सा नयी पीढी के निर्माण के लिए अपने विद्यालय को उन्होंने समर्पित कर दिया।

प्रश्न- Class 9 Hindi Chapter 5 Question Answer

प्रश्न 1. स्वतंत्र भारत में दुर्गा भाभी का सम्मान किस प्रकार किया गया?

प्रश्न 2. दुर्गा भाभी ने भेंट स्वरूप प्रदान किये गये रुपये लेने से इंकार क्यों कर दिया?

प्रश्न 3. दर्गा भाभी संसदीय राजनीति से दूर क्यों रहीं।

पश्न 4. आजादी के बाद उन्होंने अपने को किस प्रकार व्यस्त रखा?

प्रश्न 5. दुर्गा भाभी के व्यक्तित्व की कौनसी विशेषता आप अपनाना चाहेंगे?

उत्तर– Class 9 Hindi Chapter 5 Question Answer

उत्तर-1. कुछ सरकारों ने भाभी को पैसों से तोलना चाहा । पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री दरबारासिंह ने उनके सम्मान में समारोह आयोजित किया और उन्हें इक्यावन हजार रुपये भेंट किये।

उत्तर-2. दुर्गा भाभी का मानना था कि आजादी की लड़ाई का उद्देश्य व्यक्तिगत लाभ पाना नहीं था। स्वतन्त्रता सेनानियों का उद्देश्य तो देश को आजाद कराना था। इस कारण वे स्वतन्त्रता के लिए किये गये संघर्ष का मूल्य नहीं लेना चाहती थीं।

उत्तर-3. दुर्गा भाभी की संसदीय राजनीति में कोई रुचि नहीं थी, इसी कारण क्रान्तिकारियों के द्वारा अनुरोध करने पर भी वह उससे दूर रही।

उत्तर-4. आजादी के बाद उन्होंने एक विद्यालय चलाया और नयी पीढी के निर्माण के लिए अपना शेष जीवन उसी में व्यस्त रखा।

उत्तर-5. उनके व्यक्तित्व से हम ये विशेषताएँ अपनाना चाहेंगे। (1) नि:स्वार्थ भाव से देश-समाज की सेवा करना, (2) जनता की भलाई के कार्य करना, (3) भ्रष्ट राजनीति से दूर रहना, (4) नयी पीढ़ी के निर्माण में अपना जीवन अर्पित कर देना तथा (5) लोभ, पुरस्कार आदि का देश के हित में त्याग।

अर्थग्रहण सम्बन्धी प्रश्न Class 9 Hindi Chapter 5

निर्देश निम्नलिखित गद्यांशों को पढ़कर उनसे सम्बन्धित प्रश्नों के उत्तर दीजिए

(1) NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitiz Chapter 5

कानपुर में भीषण हत्याकाण्ड करने के बाद अंगरेज़ों का सैनिक दल बिठूर की ओर गया। बिठूर में नाना साहब का राजमहल लूट लिया गया, पर उसमें बहुत थोड़ी सम्पत्ति अंगरेज़ों के हाथ लगी। इसके बाद अंगरेज़ों ने तोप के गोलों से नाना साहब का महल भस्म कर देने का निश्चय किया सैनिक दल ने जब वहाँ तोपें लगायीं, उस समय महल के बरामदे में एक अत्यन्त सुन्दर बालिका आकर खड़ी हो गयी। उसे देखकर अंगरेज़ सेनापति को बड़ा आश्चर्य हुआ, क्योंकि महल लूटने के समय वह बालिका वहाँ कहीं दिखाई न दी थी।

प्रश्न- Class 9 Hindi Chapter 5 Question Answer

प्रश्न 1. कानपुर में कब और कौनसा भीषण हत्याकाण्ड हुआ था?

प्रश्न 2. अंगरेज़ सैनिकों ने बिठूर की ओर क्यों प्रस्थान किया?

प्रश्न 3. अंगरेज़ सैनिकों ने नाना साहब के महल को क्यों भस्म करना चाहा?

प्रश्न 4. अंगरेज़ सेनापति को आश्चर्य क्यों हुआ?

उत्तर– Class 9 Hindi Chapter 5 Question Answer

उत्तर-1. प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम सन् 1857 में क्रान्तिकारी देशभक्तों ने कानपुर में अंगरेज़ों के विरुद्ध सशस्त्र आन्दोलन किया था। उसी को दबाने के लिए अंगरेज़ सैनिकों ने वहाँ पर भीषण हत्याकाण्ड किया था।

उत्तर-2. अंगरेज़ शासन नाना साहब धुंधूपन्त को सबसे बड़ा खतरनाक विरोधी मानता था। अतएव उन्हें पकड़ने के लिए अंगरेज़ सैनिकों ने बिठूर की ओर प्रस्थान किया।

उत्तर-3. अंगरेज़ सैनिकों ने नाना साहब के महल को इसलिए भस्म करना चाहा ताकि अंगरेज़ों का विरोध करने वालों का नाम-निशान तक मिट जाये।

उत्तर-4. अंगरेज़ सेनापति ने जब नाना साहब के महल की तलाशी ली उस समय बालिका मैना वहाँ नहीं थी। लेकिन जब महल को भस्म किया जाने लगा तो वह अचानक वहाँ प्रकट हो गयी। यह देखकर अंगरेज़ सेनापति को आश्चर्य हुआ।

(2) NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitiz Chapter 5

सेनापति ने दुःख प्रकट करते हुए कहा कि कर्त्तव्य के अनुरोध से मुझे यह मकान गिराना ही होगा। इस पर उस बालिका ने अपना परिचय बताते हुए कहा कि- “मैं जानती हूँ कि आप जनरल ‘हे’ हैं। आपकी प्यारी कन्या मेरी में और मुझमें बहुत प्रेम-सम्बन्ध था। कई वर्ष पूर्व मेरी मेरे पास बराबर आती थी और मुझे हृदय से चाहती थी। उस समय आप भी हमारे यहाँ आते थे और मुझे अपनी पुत्री के समान ही प्यार करते थे। मालूम होता है कि आप वे सब बातें भूल गये हैं। मेरी की मृत्यु से मैं बहुत दुःखी हुई थी, उसकी एक चिट्ठी मेरे पास अब तक है।”

यह सुनकर सेनापति के होश उड़ गये। उसे बड़ा आश्चर्य हुआ और फिर उस बालिका को भी पहिचाना और कहा “अरे यह तो नाना साहब की कन्या मैना है।”

प्रश्न- Class 9 Hindi Chapter 5 Question Answer

प्रश्न 1. बालिका मैना के पास किसका और कौनसा स्मृति-चिह्न था?

प्रश्न 2. मैना ने सेनापति के समक्ष उसकी पुत्री के साथ सम्बन्धों की बात क्यों की?

प्रश्न 3. सेनापति ने बालिका के समक्ष दुःख क्यों प्रकट किया?

प्रश्न 4. सेनापति ‘हे’ के होश क्यों उड़ गये? बताइये।

उत्तर– Class 9 Hindi Chapter 5 Question Answer

उत्तर-1. बालिका मैना के पास अंगरेज़ सेनापति टामस ‘हे’ की पुत्री ‘मेरी’ का एक हस्तलिखित पत्र स्मृति-चिहन रूप में था। ‘मेरी’ उसकी सहेली थी और उसने मित्रता में वह पत्र लिखा था।

उत्तर-2. मैना चाहती थी कि इस तरह के सम्बन्ध बताने से सेनापति राजमहल को गिराने के उद्देश्य से विमुख हो जावेंगे और उसका प्रिय महल विनष्ट होने से बच जायेगा।

उत्तर-3. सेनापति ने बालिका के समक्ष दुःख इसलिए प्रकट किया कि वह उसके तर्कों और अनुरोध को सुनने के बाद मकान गिराना तो नहीं चाहता था, परन्तु वह अंगरेज़ सरकार का सेनापति था और उसे अपने कर्तव्य का पालन करना भी जरूरी था।

उत्तर-4. बालिका मैना ने जब ‘हे’ को बताया कि उसकी पुत्री ‘मेरी’ उसकी प्रिय सहेली थी। उसकी हस्तलिखित चिट्ठी भी उसके पास है। यह जानकर सेनापति ‘हे’ को आश्चर्य हुआ और उसके होश उड़ गए।

(3) NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitiz Chapter 5

बड़े दुःख का विषय है कि भारत-सरकार आज तक उस दुर्दान्त नाना साहब को नहीं पकड़ सकी, जिस पर समस्त अंगरेज़ जाति का भीषण क्रोध है। जब तक हम लोगों के शरीर में रक्त रहेगा, तब तक कानपुर में अंगरेज़ों के हत्याकाण्ड का बदला लेना हम लोग न भूलेंगे। उस दिन पॉर्लमेण्ट की हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स सभा में सर टामस ‘हे’ की एक रिपोर्ट पर बड़ी हँसी हुई, जिसमें सर’हे’ ने नाना की कन्या पर दया दिखाने की बात लिखी थी।

‘हे’ के लिए निश्चय ही एक कलंक की बात है- जिस नाना ने अंगरेज़ नर-नारियों का संहार किया, उसकी कन्या के लिए क्षमा! अपना सारा जीवन युद्ध में बिताकर अन्त में वृद्धावस्था में सर टामस ‘हे’ एक मामूली महाराष्ट्र बालिका के सौन्दर्य पर मोहित होकर अपना कर्त्तव्य ही भूल गये।

प्रश्न- Class 9 Hindi Chapter 5 Question Answer

प्रश्न 1. प्रथम वाक्य में ‘भारत सरकार’ से क्या तात्पर्य है?

प्रश्न 2. सेनापति ‘हे’ की हँसी क्यों उड़ाई गयी थी?

प्रश्न 3. “सेनापति ‘हे’ के लिए यह कलंक की बात है।” किसने कहा?

प्रश्न 4. अंगरेज़ लोग नाना साहब की बेटी मैना पर इतने कुपित क्यों थे?

उत्तरClass 9 Hindi Chapter 5 Question Answer

उत्तर-1. प्रथम वाक्य में आये ‘भारत सरकार’ से तात्पर्य उस समय की ब्रिटिश सरकार से है।

उत्तर-2. सेनापति ‘हे’ ने नाना साहब की पुत्री मैना पर दया करके उसे छोड़ देने की प्रार्थना की थी। उनकी इस प्रार्थना में दया को मूर्खता कहकर उनकी हँसी उड़ाई गयी थी।

उत्तर-3. “सेनापति ‘हे’ के लिए यह कलंक के लंदन की ‘हाउस आफ लाई’ सभा के सदस्यों ने कहा।

उत्तर-4. अंगरेज़ लोग नाना साहब की बेटी मैना पर इसलिए कुपित थे, क्योंकि उसके पिता स्वतंत्रता संग्राम के विद्रोही नेता थे और उन्हीं के नेतृत्व में कानपुर में अंगरेज़ों का हत्याकांड हुआ था।

बोधात्मक प्रश्न NCERT Solutions for Class 9 Hindi

प्रश्न 1. नाना साहब अपनी पुत्री मैना को अपने साथ क्यों न ले जा सके?

उत्तर नाना साहब सन् 1857 के स्वतन्त्रता संग्राम के अग्रणी नेता थे। संघर्ष के दौरान कानपुर उनका केन्द्र था। उन्हीं के नेतृत्व में कानपुर में सशस्त्र क्रान्ति हुई थी। उसमें अनेक अंगरेज़ मारे गये थे। अन्ततः स्वतंत्रता संग्राम असफल हो गया था जिसके कारण उन्हें कानपुर छोड़कर भागना पड़ा था। इस जल्दीबाजी में वे अपनी पुत्री मैना को अपने साथ नहीं ले जा पाये थे।

प्रश्न 2. अंगरेज़ सैनिक नाना साहब के महल को क्यों लूटना और नष्ट करना चाहते थे?

उत्तर सन् 1857 के प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम में नाना साहब ने कानपुर में अंग्रेजों से टक्कर लेकर उन्हें काफी नुकसान पहुँचाया था। वहाँ से नाना साहब अपने महल बिठूर में गये और फिर वहाँ से किसी गुप्त स्थान पर चले गये। कानपुर में हुए हत्याकाण्ड का बदला लेने की नीयत से अंगरेज़ सैनिकों ने बिठूर में उनका महल घेरा, नाना साहब को जीवित न पकड़ पाने से खीझकर अंगरेज़ महल को लूटना और नष्ट करना चाहते थे।

प्रश्न 3. मैना का परिचय पाकर जनरल ‘हे’ पर उसका क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर मैना का परिचय पाकर जनरल ‘हे’ दयाभाव से पूरित हो गया और कहा कि मैं अंगरेज़ सरकार का नौकर हूँ, उसकी आज्ञा नहीं टाल सकता। फिर भी मैं तुम्हारी रक्षा करने का प्रयत्न करूंगा। इस तरह मैना का परिचय पाकर जनरल ‘हे’ पर अच्छा प्रभाव पड़ा।

प्रश्न 4. सेनापति ‘हे के जाने के बाद जनरल अउटरम ने क्या किया?

उत्तर सेनापति ‘हे’ के जाने के बाद जनरल अउटरम ने नाना साहब के महल को घेर लिया। इसकी आज्ञा पर महल का फाटक तोड़कर अंगरेज़ सैनिक भीतर घुस गये और मैना को खोजने लगे। वे महल में लूटपाट भी करते रहे, परन्तु सारे महल का कोना-कोना खोज डालने पर भी उन्हें मैना का पता नहीं लगा। इस तरह उस समय अउटरम को मैना को गिरफ्तार किये बिना जाना पड़ा।

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