Aatm Nirbhar Bharat Make in India Essay in Hindi 2021

Aatm Nirbhar Bharat Make in India Essay in Hindi

निबन्ध-लेख

  • मेक इन इंडिया अथवा स्वदेशी उद्योग
  • आत्मनिर्भर भारत
  • इक्कीसवीं सदी का भारत अथवा  मेरे सपनों का भारत

(1) Make in India Essay in Hindi

मेक इन इंडिया अथवा स्वदेशी उद्योग

संकेत बिन्दु- 1. प्रस्तावना 2. मेक इन इंडिया प्रारम्भ एवं उद्देश्य 3. स्वदेशी उद्योग 4. योजना के लाभ 5. उपसंहार।

प्रस्तावना- किसी भी देश की समृद्धि एवं विकास का मुख्य आधार उसकी आर्थिक एवं उत्पादन क्षमता होती है। जिस प्रकार भारत देश प्राचीन काल से ही ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में विश्वगुरु के पद पर प्रतिष्ठित है, उसी प्रकार वर्तमान में आर्थिक सम्पन्नता की दृष्टि से भी भारत विश्व के प्रगतिशील देशों में अग्रणी बनता जा रहा है। इसके लिए स्वदेशी की भावना निरन्तर प्रत्येक भारतीय के हृदय में विकसित होना आवश्यक है।

मेक इन इंडिया प्रारम्भ एवं उद्देश्य- भारत को सुखसुविधा सम्पन्न और समृद्ध बनाने, अर्थव्यवस्था के विकास की गति बढ़ाने, औद्योगीकरण और उद्यमिता को बढ़ावा देने और रोजगार का सृजन करने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा 25 सितम्बर, 2014 को वस्तुओं और सेवाओं को देश में ही बनाने के लिए मेक इन इंडिया’ यानी भारत में बनाओ’ (स्वदेशी उद्योग) नीति की शुरुआत की थी।

इसके माध्यम से सरकार भारत में अधिक पूँजी और तकनीकी निवेश पाना चाहती है। इसके लिए भारत सरकार का प्रयास है कि विदेशों में रहने वाले सम्पन्न भारतीय तथा अन्य उद्योगपति भारत में आकर अपनी पूँजी से उद्योग लगायें। वे अपने उत्पादन को भारतीय बाजार तथा विदेशी बाजारों में बेचकर मुनाफा कमा सकेंगे तथा भारत को भी इससे लाभ होगा।

स्वदेशी उद्योग- मेक इन इंडिया का ही स्वरूप स्वदेशी उद्योग है। अपने देश को सुख-सुविधा सम्पन्न और समृद्ध बनाने के लिए स्वदेशी उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए ही उक्त नीति को प्रारम्भ किया गया है। वर्तमान में कोरोना महामारी के बाद तो इसके स्वरूप को और अधिक विस्तृत करते हुए इसे आत्मनिर्भर भारत’ नाम दिया गया है, जिसका प्रमुख लक्ष्य अपने देश को पूर्णतया आत्मनिर्भर बनाते हुए विदेशी पूँजी को भी भारत में लाना तथा रोजगार के अवसर विकसित करना है।

योजना के लाभ- ‘मेक इन इंडिया’ अथवा ‘स्वदेशी उद्योग’ की योजना के द्वारा सरकार विभिन्न देशों की कम्पनियों को भारत में कर छूट देकर अपना उद्योग भारत में ही लगाने के लिए प्रोत्साहित करती है, जिससे भारत का आयात बिल कम हो सके और देश में रोजगार का सृजन हो सके। इस योजना से निर्यात और विनिर्माण में वृद्धि होगी जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार होगा, साथ ही भारत में रोजगार सृजन भी होगा।

उपसंहार- ‘मेक इन इंडिया’ की शुरुआत होने के बाद से और विशेषतः कोराना वैश्विक महामारी के कारण भारत देश निवेश के लिए न केवल बहुराष्ट्रीय कम्पनियों अपितु विदेशों में रहने वाले भारतीय उद्योगपतियों की पहली पसन्द बन गया है। आज भारत ‘स्वदेशी उद्योग’ अथवा ‘मेक इन इंडिया’ नीति के कारण रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक, हार्डवेयर आदि क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनता हुआ विश्व का एक सम्पन्न और समृद्ध राष्ट्र बनने की ओर अग्रसर है।

(2) Aatm Nirbhar Bharat Essay in Hindi

आत्मनिर्भर भारत

संकेत बिन्दु- 1. प्रस्तावना 2. आत्मनिर्भर भारत 3. आत्मनिर्भर भारत के पाँच स्तम्भ 4. आत्मनिर्भरता के उपाय एवं लाभ 5. उपसंहार।

प्रस्तावना- शास्त्रों में कहा गया है कि सर्वं परवशंदुःखम्‘ ‘सर्वमात्मवशं सुखम् अर्थात् सब तरह से दूसरों पर निर्भर रहना ही दुःख है एवं सब प्रकार से आत्मनिर्भर होना ही सुख है। इसका प्रत्यक्ष अनुभव कोरोना वैश्विक महामारी के समय स्पष्ट रूप से सभी को हुआ है। इस महामारी के कारण देश की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हुआ है। देश को समृद्ध व सुखी बनाने के लिए तथा कोरोना महामारी का मुकाबला करने के लिए भारत के प्रधानमन्त्री ने 12 मई, 2020 को आत्मनिर्भर भारत अभियान शुरू करने की घोषणा की।

आत्मनिर्भर भारत- भारत के प्रधानमन्त्री ने कोरोना महामारी से पहले और बाद की दुनिया का उल्लेख करते हुए कहा कि 21वीं सदी को भारत की सदी बनाने के सपने को पूरा करने के लिए यह सुनिश्चित करते हुए आगे बढ़ना है कि देश आत्मनिर्भर हो जाए। आज भूमण्डलीकृत दुनिया में आत्मनिर्भरता के मायने बदल गए हैं। जब भारत आत्मनिर्भरता की बात करता है तो वह आत्मकेन्द्रित व्यवस्था को प्रश्रय नहीं देता है।

भारत की संस्कृति सम्पूर्ण विश्व को एक परिवार के रूप में  मानती है और भारत की प्रगति में हमेशा विश्व की प्रगति समाहित रही है। अत: आत्मनिर्भर भारत का तात्पर्य स्वदेशी उद्योगों को बढ़ावा देने के साथ-साथ विदेशी निवेश को भी बढ़ावा देना है, जिससे यहाँ रोजगार के अधिकाधिक अवसर उपलब्ध हो सकें एवं भारत की आर्थिक समृद्धि के साथ ही विश्व का भी कल्याण हो सके।

आत्मनिर्भर भारत के पाँच स्ताभ- प्रधानमन्त्री महोदय के अनुसार आत्मनिर्भर भारत के पाँच स्तम्भ इस प्रकार हैं, 1. अर्थव्यवस्था, जो वृद्धिशील परिवर्तन नहीं, बल्कि लम्बी छलाँग सुनिश्चित करती है। 2. बुनियादी ढाँचा, जिसे भारत की पहचान बन जाना चाहिए। 3. प्रणाली (सिस्टम), जो 21वीं सदी की प्रौद्योगिकी संचालित व्यवस्थाओं पर आधारित हो। 4. उत्साहशील आबादी, जो आत्मनिर्भर भारत के लिए। हमारी ऊर्जा का स्रोत है, तथा 5. माँग, जिसके तहत हमारी माँग एवं आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) की ताकत का उपयोग पूरी क्षमता से किया जाना चाहिए।

आत्मनिर्भरता के उपाय एवं लाभ- आत्मनिर्भरता के लिए भूमि, श्रम, तरलता और कानूनों पर फोकस करते हुए कुटीर उद्योग, एमएसएमई, मजदूरों, मध्यम वर्ग तथा उद्योगों सहित विभिन्न वर्गों की जरूरतों को पूरा करना आवश्यक है। इसी आवश्यकता को पूरा करने के लिए मनोबल के साथ-साथ आर्थिक सहायता के रूप में भारत सरकार ने विभिन्न चरणों में लगभग बीस लाख करोड़ रुपयों के एक विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा की है, जो विभिन्न क्षेत्रों में दक्षता और गुणवत्ता बढ़ाने, गरीबों, मजदूरों, प्रवासियों इत्यादि को सशक्त बनाने में सहायक होगा।

आत्मनिर्भरता भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में कड़ी प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करेगी। इसके लिए लोकल (स्थानीय या विदेशी) उत्पादों का गर्व से प्रचार करने और इन लोकल उत्पादों को वैश्विक बनाने में मदद करने की आवश्यकता है। इन उपायों को करने से भारत न केवल आर्थिक दृष्टि से सशक्त होगा, अपितु विश्व में विकासशील देशों में अग्रणी बन सकेगा।

उपसंहार- वर्तमान संकट ने सम्पूर्ण विश्व को आत्मनिर्भरता के महत्त्व को पूर्णतया समझा दिया है। आत्मनिर्भरता ही सभी तरह के संकटों का सामना करने का सशक्त हथियार है। जिसके बल से हम आर्थिक संकट रूपी युद्ध को जीत सकते हैं। अतः विश्व में भारत की महत्ता एवं सम्पन्नता को बनाये रखने के लिए आत्मनिर्भर भारत की अति आवश्यकता है।

(3) Essay on 21st century India

इक्कीसवीं सदी का भारत  अथवा  मेरे सपनों का भारत

संकेत बिन्दु- 1. प्रस्तावना 2. नव-स्वतन्त्र भारत के प्रति मेरी भावना 3. इक्कीसवीं सदी का भारत 4. प्रगतिशील भारत की कामना 5. उपसंहार।

प्रस्तावना- मानव विचारशील प्राणी है। वह एकान्त में हो या सामाजिक जीवन में हो, कुछ-न-कुछ सोचताविचारता रहता है। उसके विचार कभी अपने तक ही सीमित रहते हैं तथा कभी समाज व राष्ट्र तक फैल जाते हैं। मैं भी कभी अन्य विषयों पर न सोचकर यही सोचा करता हूँ कि यदि मेरे सपनों का भारत बन जाए तो कितना अच्छा रहे !

नव-स्वतन्त्र भारत के प्रति मेरी भावना- अपने विकासशील देश भारत को लेकर मेरे मन में अनेक विचार उठते रहते हैं, मैं भी कभी-कभी अपनी कल्पनाओं के पंख फैलाने लगता हूँ। इस कारण मैं सोचता हूँ कि यदि इक्कीसवीं  सदी में मेरे सपनों का भारत हो जाए, तो कितना सुखद भविष्य हो जाए!

इक्कीसवीं सदी का भारत- इक्कीसवीं सदी का शुभारम्भ हो गया है। इक्कीसवीं सदी में मेरे सपनों का भारत कैसा होगा उसमें किन बातों की वृद्धि होगी, उन्हें यहाँ इस प्रकार रेखांकित किया जा सकता है। मेरे सपनों के भारत में चारों ओर खुशहाली, समता, भाईचारा और सदाचार का बोलबाला होगा। हमारी आकांक्षा है कि ऐसा भारत हो जिसमें गरीबी और शोषण उत्पीड़न का नामोनिशान न हो। सभी को काम मिले। सब अपने पैरों पर खड़े होकर स्वावलम्बी जीवन व्यतीत करने में सक्षम हों। सब  एक-दूसरे के सुख-दुःख में सहभागी बनें।

भ्रष्टाचार, कालाबाजारी, रिश्वतखोरी और अपराध समूल नष्ट हों। मेरे सपनों के भारत में सभी तरह के रोगों से जनता को मुक्ति मिले, अकाल-अतिवृष्टि या प्राकृतिक प्रकोप नहीं होवें, सभी का जीवन उन्नत-खुशहाल हो, यही मेरी कामना है।

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प्रगतिशील भारत की कामना- आज का युग विज्ञान का युग है। दुनिया के अन्य राष्ट्रों में विज्ञान के नये आविष्कार हो रहे हैं, शुक्र और मंगल ग्रह की यात्रा पर जाने की तैयारियाँ हो रही हैं। मैं कामना करता हूँ कि हमारे भारत में भी विज्ञान के क्षेत्र में अत्यधिक प्रगति हो। आने वाले काल में भारत में अनेक उद्योग स्थापित किये जाएँ और उनमें उत्पादन का प्रतिशत बढ़े, निर्यात व्यापार बढ़े और राष्ट्रीय जीवन में आय-वृद्धि होने से जीवन-स्तर उन्नत हो जाए। इसके साथ ही सभी क्षेत्रों में पर्याप्त उन्नति हो और देश का गौरव बढ़े।

उपसंहार- मैं अपने देश भारत को समुन्नत एवं वैभवशाली देखना चाहता हूँ, परन्तु केवल मेरे सोचने से तो यह हो ही नहीं सकता। इसलिए सारे भारतीय भी इसी प्रकार सोचने लगें और सभी एकजुट होकर राष्ट्रोन्नति के कार्य में परिश्रम करें, तो वह सुदिन अवश्य आ सकता है।

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